मानसिक हलचल पर सर्च-इन्जन द्वारा, सीधे, या अन्य ब्लॉग/साइट्स से आने का यातायात बढ़ा है। पर अभी भी फीड एग्रेगेटरों की सशक्त भूमिका बनी हुई है। लगभग एक चौथाई क्लिक्स फीड एग्रेगेटरों के माध्यम से बनी है। मैं फीड संवर्धन की कोई स्ट्रेटेजी नहीं सोच पाता और न ही हिन्दी ब्लॉगरी में मीडियम टर्म मेंContinue reading “ब्लॉग पर यातायात – फुटकर सोच”
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
आज सवेरा न जागे तो मत कहना
मेरी पत्नीजी ने कबाड़ से मेरी एक स्क्रैप बुक ढूंढ़ निकाली है। उसमें सन १९९७ की कुछ पंक्तियां भी हैं। यूं देखें तो ब्लॉग भी स्क्रैप बुक ही है। लिहाजा स्क्रैप बुक की चीज स्क्रैप बुक में – आज सवेरा न जागे तो मत कहना घुप्प कोहरा न भागे तो मत कहना दीवारों के कानोंContinue reading “आज सवेरा न जागे तो मत कहना”
यह सबसे बड़ी टिप्पणी है!
ज्ञानजी, यह मैं क्या पढ़ रहा हूँ? जब कोई विषय नहीं सूझता था तो आप मक्खियों पर, आलू पर और टिड्डे पर लिखते थे। चलो आज और कोई अच्छा विषय न मिलने पर मुझ पर एक और लेख लिख दिया। विनम्रता से अपना स्थान इन नाचीजों के बीच ले लेता हूँ ! यह लेख श्रीContinue reading “यह सबसे बड़ी टिप्पणी है!”
