दस जून: श्रद्धा की छाया में छब्बीसवां दिन नीलकंठ से रवाना होते ही एक सज्जन पीछे से आये और प्रेमसागर को हलवा दे कर चले गये। ज्यादा बात भी नहीं हुई उनसे। यह जरूर था कि वे नीलकंठ के थे। अपने खेत पर जाने की जल्दी मे थे वे। नाम बताया – रघुराज सिंह। यूंContinue reading “नीलकंठ से गंजीत”
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करौंदमाफी से नीलकंठ
दिनांक 09 जून करौंदमाफी में आश्रम की व्यवस्था अच्छी थी। आसपास गांव नहीं था। आश्रम से दूरी पर गांव थे। पर आश्रम का अन्नक्षेत्र चल रहा था। मैने पूछा – रात की प्रसादी में क्या था? “रोटी, दाल, भुजिया आलू की, चावल सब था। सब भरपेट था भईया। मांगने की भी जरूरत नहीं थी। घूमContinue reading “करौंदमाफी से नीलकंठ”
राजोर से करोंदमाफी
8 जून: प्रेमसागर की पदयात्रा में किसान की पीड़ा, बिटिया की प्रसादी और माफी गांव की कथा अजय पाल जी के घर से थोड़ा देर से निकले प्रेमसागर। “हम तो तैयार थे भईया, पर उन लोगों का दरवाजा थोड़ा देर से खुला। बिना कह कर बिदा लिये चलना मुझे ठीक नहीं जान पड़ा।” दिन मेंContinue reading “राजोर से करोंदमाफी”
