जून 19-20 को रही हीरापुरा और उससे आगे की पदयात्रा। मुझे मोटे तौर पर तीन विषय दिये प्रेमसागर ने। पहला था हीरापुरा में राजराजेश्वरी मंदिर। यह दक्षिण भारतीय शैली में बना है। स्थापत्य का विश्लेषण तो मैं नहीं कर सकता, पर देखने में सुंदर जरूर लगता है। चार दशक पहले तिरुनलवेलि के तमिळ संत आयेContinue reading “हीरापुरा से धर्मपुरी – तीन ठहराव”
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पाठक जी का शतक जमाता घर
दिनांक 18जून, दोपहर। प्रेमसागर 10 किलोमीटर चल कर सोकलपुर से हीरापुर पंहुचे। नर्मदा किनारे किनारे चले। प्रेमसागर ने बताया कि स्थानीय लोगों के अनुसार श्रद्धालु यहां भी एक पंचकोशी नर्मदा परिक्रमा होती है। हीरापुर से सोकलपुर और वापसी की। अशोक शुक्ल जी, जिनसे परिचय ट्विटर (अब X) पर हुआ; का कहना है कि ये दोनोContinue reading “पाठक जी का शतक जमाता घर”
सोकलपुर से हीरापुर – कच्चा रास्ता, नदी और वन
कल (18 जून 25) प्रेमसागर सोकलपुर से हीरापुर पंहुचे। कुल 10 किलोमीटर की पदयात्रा। विनोद पाठक जी का एक रात रुकने का निमंत्रण न रहा होता तो प्रेम बाबाजी ज्यादा ही चलते। शिवम कृष्ण बुधलिया जी दो किलोमीटर चले होंगे तभी मिले सड़रई गांव में शिवम कृष्ण बुधौलिया जी। वे अपने घर के सामने इंतजारContinue reading “सोकलपुर से हीरापुर – कच्चा रास्ता, नदी और वन”
