<<< यात्रा बनाम यात्राविरक्ति >>> आज सवेरे शैलेश पाण्डेय ने प्रयाग से फोन किया। उनका कहना था कि यूं ही उठूं, अपनी गाड़ी में तेल भराऊं और प्रयाग के दारागंज वाले परेड ग्राऊण्ड में पंहुच जाऊं। वहां वे मिल जायेंगे और पूरा मेला साथ रह कर घुमवा देंगे। घूम कर वापस लौटा जा सकता है।Continue reading “यात्रा बनाम यात्राविरक्ति”
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मूंगफला के बहाने
<<< मूंगफला के बहाने >>> पड़ाव के नुक्कड़ पर मूंगफली वाला अपना ठेला लगाता है। सवेरे दस बजे हैं तो आ ही गया होगा। देवकली से आता है। आते आते भी समय लगता है। तीन चार तरह की मूंगफली रखता है। एक सिगड़ी पर भूनता भी है और हाथ के हाथ बेचता है। दो तीनContinue reading “मूंगफला के बहाने”
दशरथदास जी का जीवन देखने की चाह
<<< दशरथदास जी का जीवन देखने की चाह >>> प्रेमसागर ने मेला क्षेत्र से दो चरित्रों से परिचय कराया। बेतिया के श्रीकांत जी और राम रगड़ आश्रम, प्रह्लादघाट, अयोध्या के दशरथदास जी से। मैं जिस तरह की दुनियां-समाज में रह रहा हूं, उससे अलग हैं ये लोग। श्रीकांत जी बेतिया में किसी मंदिर में हैं।Continue reading “दशरथदास जी का जीवन देखने की चाह”
