लाहदेरांता में चुनचुन बाजपेयी


<<< लाहदेरांता में चुनचुन बाजपेयी >>> यह जगह लाहदेरांता काल्स्त्रॉन्द (Lähderanta Källstrand); फिनलैंड में राजधानी हेलसिंकी से 100किमी दूर है। शायद हेलसिंकी का सबर्ब कहा जाता हो। सन 1960 के आसपास इसकी परिकल्पना रिहायशी क्षेत्र के रूप में की गई। यहां जैसे गाजीपुर, आजमगढ़, भदोही आदि के लोग अपने को बनारस का कहते हैं; वैसेContinue reading “लाहदेरांता में चुनचुन बाजपेयी”

मचान के देखुआर अनूप सुकुल


<<< मचान के देखुआर अनूप सुकुल >>> कल अनूप शुक्ल जी, सपत्नीक मिलने आये। हम लोग हिंदी ब्लॉगिंग के स्वर्णकाल (?) से मित्र हैं। मेरी उनसे मुलाकात सतरह साल पहले कानपुर रेलवे स्टेशन के एक रेस्ट हाउस में हुई थी। मैं उनके लेखन का मुरीद हूं। पता नहीं वे यह भाव रेसीप्रोकेट करते हैं याContinue reading “मचान के देखुआर अनूप सुकुल”

कल्पना में रेल कथा


<<< कल्पना में रेल कथा >>> मैं मचान पर बैठता हूं तो आधा किलोमीटर दूर रेलवे फाटक से गुजरती ट्रेने देख मेरे अतीत से प्रेरित; पॉपकॉर्न की तरह, कथायें फूटने लगती हैं। कुछ इस तरह लगता है कि मैं अर्धनिद्रा में चला गया हूं और केलिडोस्कोप में सीन-प्लॉट-पात्र-घटनायें बन बिगड़ रहे हैं। जमीन से सातContinue reading “कल्पना में रेल कथा”

Design a site like this with WordPress.com
Get started