होमवर्क की आउटसोर्सिंग!


homework_red_1 बच्चों का होमवर्क मम्मियां करती हैं – प्राइमरी कक्षाओं तक। पर यह तो गजब है – आस्ट्रेलिया के कम्प्यूटर साइंस के विद्यार्थी अपना होमवर्क भारत के प्रोग्रामर्स को आउटसोर्स कर दे रहे हैं! और १०० आस्ट्रेलियायी डालर्स में उनका काम पक्का कर उन्हे मिल जा रहा है। बाकायदा रेण्ट-अ-कोडर पर निविदा निकलती है। कोडर अपनी बोली भरते हैं और भारतीय अपनी बोली कम होने के आधार पर बाजी मारते हैं।
भैया हमारे जैसे “जीरो बटा सन्नाटा” कितने समय में प्रोग्रामिंग सीख कर यह निविदा भरने लायक बन सकते हैं? अपने बच्चे का होमवर्क तो करा/कराया नहीं कभी, इन आस्ट्रेलियायी विश्वविद्यालय जाने वाले बच्चों का भला करने लायक बन जायें! homework 
यह खबर पीटीआई की है – मेलबर्न/सिडनी से। पर जब मैने नेट पर सर्च किया तो पाया कि अमेरिका में यह पवित्र कार्य दो साल पहले भी हो रहा था!
अब कौन तेज है – अमरीकन, आस्ट्रेलियायी या भारतीय!


Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring rural India with a curious lens and a calm heart. Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges. Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh. Writing at - gyandutt.com — reflections from a life “Beyond Seventy”. FB / Instagram / X : @gyandutt | FB Page : @gyanfb

23 thoughts on “होमवर्क की आउटसोर्सिंग!

  1. तो मुख्य बहस नैतिकता पर टिक गयी है. छोटे बच्चों को जिस तरह ढेर सारे होमवर्क से लाद दिया जाता है वही कहाँ तक ठीक है? मम्मियों द्वारा बच्चों का होमवर्क करने के पीछे शायद अपना समय बचाने की नीति रहती होगी. वैसे हमारे यहाँ abhee तक esi परम्परा नहीं padee है. बिटिया जी ख़ुद ही पूरा होमवर्क kartee हैं, लेकिन पूरे समय nigraanee karnee पड़ती है वरना मन bhatakne में देर नहीं lagtee. abhee UKG में हैं. (why does this google transliteration go off so often?)

    Like

  2. अजी यह शुभ कार्य हमारे यहां से ही गया हे, बच्चे बेठे ऊघ रहे हे, पास बेठी मां एक चाटां बच्चे को मारा ओर पुछती हे ऎसे ही करना हे ना ओर खुद ही लिखती जा रही हे,कभी कभी पुछती हे ठीक हे ना बच्चा सोया सोया ही हिल रहा हे या सिर हिला रहा हे पता नही, लेकिन ममी जी झट पट सारा होम्वर्क कर करके बच्चे को शावाशी देती हे,देखो लक्की ने अपना सारा काम निपटा लिया, लेकिन रजल्ट आने पर उस गरीब की पिटाई,अरे … यह सब आंखो देखा हाल लिखा हे.. अब बताये हम दुनिया मे सब से आगे हे या नही

    Like

  3. ———————-यहां बात मैं “होमवर्क” के आउटसोर्सिंग की कर रहा हूं – जो मेरे विचार में अनैतिक है! ———————-एकदम सही।किसी के विचार में भी यह होमवर्क का आउटसोर्सिग अनैतिक होनी चाहिए। लेकिन जब तक अनैतितका से किसी को लाब होता है, यह चलता रहेगा। इसे रोकना भी आसान नहीं। इस सन्दर्भ में एक पुराना न्यूज़ आइटम भी याद आ रहा है।इंग्लेंड में old age homes महँगे हो गये हैं।भारत में ऐसे कुछ खास old age homes के बारे में सोचा जा रहा था जहाँ यूरोप के वृद्ध नागरिकों को भेज सकेंगे।यानी वृद्धों का देखबाल का भी आउटसोर्सिंग!क्या यह अनैतिक होगा?सोचने वाली बात है।

    Like

  4. हमारे यहाँ बच्चों का गृहकार्य माँ-बाप को निपटाते हुए देखा है, यह भी अनैतिक ही है. कॉलेजों के कई विद्यार्थी भी व्यवसायिक दक्ष लोगो से काम करवाते है, यह भी अनैतिक ही है. इसी तरह नई तकनिक के चलते दूर बैठे लोग अपना कार्य किसी और करवा रहे है, सरासर गलत है.

    Like

  5. मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि आउटसोर्सिंग व्यवसाय बहुत अच्छा है – दोनों के लिये। आउटसोर्सक और काम करने वाला दोनो खुश रहते हैं। यहां बात मैं “होमवर्क” के आउटसोर्सिंग की कर रहा हूं – जो मेरे विचार में अनैतिक है!

    Like

  6. ————————–पंकज अवधिया Pankaj Oudhia said… रेट कम हो रहे है या कहे पहले से कम ही है। भारतीयो का शोषण ज्यादा है।——————-पंकज जी,शोषण कैसे?अपनी मर्जी से ही काम करते हैं। इसमे जबर्दस्ती हो ही नहीं सकती।अगर रेट कम लगता है तो हमें काम स्वीकार करने से इनकार करने का पूरा अधिकार है।उलटा, मैं ने अमरीकी ग्राहकों को कह्ते सुना है कि भारत के कुछ लोभी लोग अमरीकी वालों के शोषण कर रहे हैं ज्यादा माँगकर।शोषण तब होता है जब ड्राइवर, बावर्ची, आया, नौकरानी, नर्स वगैर्ह दुबई या साउदी अरेबिया जाते हैं और उन लोगों की पासपोर्ट जब्त करके, उनसे कम वेतन पर काम लिया जाता है।भारत-अमरीका का यह औटसोर्सिन्ग व्यवसाय, भिन्न है।मुझे खुशी हुई यह सुनकर की आपको अपना माँगा हुआ पैसा मिल गया।सही राशी उनके cost और हमारे cost के बराबर बीच में हो तो दोनों को लाभ होता है। यह एक डबलरोटी का slice है जिसपर दोनों तरफ़ मक्खन लगा हुआ है। हम एक तरफ़ को चाटेंगे, और वे दूसरी तरफ़।आपकी शोषण वाली बात मेरी समझ में नहीं आई।शुभकामनाएं

    Like

  7. ज्ञान जी,आस्ट्रेलिया और अमरीका वालों को हिन्दी ब्लॉग लेखन का चस्का लगवा देते हैं, फ़िर हम सब लोग मिल कर पुरस्कार बाँटेंगे | पहले जानबूझ अमरीका वालों को दे देंगे और सब अपने ब्लॉग पर उनकी तारीफ़ लिखेंगे | उसके बाद धंधा चालू करेंगे कि अपना हिन्दी ब्लॉग आउटसोर्स करो और पुरस्कार जीतने की गारंटी भी | कहिये, बात चलाई जाए आस पड़ोस में :-)

    Like

आपकी टिप्पणी के लिये खांचा:

Discover more from मानसिक हलचल

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading

Design a site like this with WordPress.com
Get started