नैनो परियोजना बंगाल से जा रही है। मशीनरी बाहर भेजी जा रही है। चुनाव का समय आसन्न है। साम्यवादी शासन मुक्त हुआ। अब जनता में सर्वहारा समर्थक छवि लाई जा सकती है।
ब्लॉगजगत में भी अब मुक्त भाव से उद्योगपतियों की निंदा वाली पोस्टें आ सकती हैं।
टाटा नैनो, बाय-बाय!
यह नैनो (गुजराती में नानो – छोटा या माइक्रो) पोस्ट लिख तो दी पर अभियक्ति का जो तरीका बना हुआ है, उसमें यह छोटी पड़ रही है। अब मुझे अहसास हो रहा है कि जैसे मुझे माइक्रो पोस्ट नहीं पूरी पड़ रही, फुरसतिया सुकुल को छोटी पोस्ट लिखना क्यों नहीं रुचता होगा। हर एक को अपनी ब्लॉग रुचि के हिसाब से पोस्ट साइज ईजाद करना पड़ता है। जब हम की-बोर्ड के समक्ष बैठते हैं तो पोस्ट की परिकल्पना बड़ी नेब्युलस (nebulous – धुंधली) होती है। वह की-बोर्ड पर आकार ग्रहण करती है। पर सम्प्रेषण की लम्बाई की एक सोच मन में होती है। उसको अचीव किये बिना नौ-दो-इग्यारह होने का मन नहीं करता।
पता नहीं साहित्य लेखक भी इसी प्रकार से लिखते हैं अथवा उनके मन में लेखन की डीटेल्स बहुत स्पष्ट होती हैं। ब्लॉग पर तो अपनी विषयवस्तु प्री-प्लॉण्ड पा लेना कठिन लगता रहा है; लेकिन ब्लॉगिंग में अपने साइज की पोस्ट पा लेना भी एक सुकूनोत्पादक बात है! नहीं?
लगता है पोस्ट की लम्बाई पर्याप्त हो गई है – अब पब्लिश की जा सकती है!


माइक्रो और मैक्रो का गठबंधन है यह पोस्ट। गठबंधन स्थायी नहीं हो रहा आजकल। सो एक पर आइये। अखबार पाने के लिये आवाज उठाना पड़ेगी। जैसे आज समीरलालजी ने उठाई -हम जाग गये हैं कहकर!
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यह माइक्रो पोस्ट है बड़ा मजेदार आइटम…। आइडिया आते ही मिनट भर में पोस्ट तैयार। आज मैने भी आजमाया है।वैसे पोस्ट की लम्बाई कम ही ठीक है जितने से जरूरी बातें कवर हो जाएं। अनावश्यक विस्तार से आकर्षण चला जाता है। बिलकुल स्कर्ट की तरह ठीक-ठीक लम्बाई ही रखनी चाहिए।
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आकार से बेहतर पोस्ट की खुराक लगी वैसे यदि खुराक बढ़िया है तो आकार कोई मायने नहीं रखता। ये मेरी सोच है।
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bye-bye hee hotee rahegee ? ya kabhee kisi ke haath bhee lagegee ?
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सभी की बात यही कह रही है आपसे सहमति की :)- लावण्या
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संक्षिप्तता वक्तृता की आत्मा है -यह किस प्रुमुख अंगरेजी के जुमले का अनुवाद है -मेरा माईक्रो जवाब !
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पोस्ट की लम्बाई पर ज्यादा ध्यान देंगे, तो परेशान हो जाएंगे। मेरी समझ से जो लिखना है, लिखते रहें, लम्बाई चौडाई पर ध्यान मत दें। जिसे पढना होगा, वह पढेगा ही और कमेंट भी करेगा।
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आपकी माइक्रो पोस्ट से भी हम समझ गए जो आप कहना चाहते हैं….इसका मतलब छोटा हमेशा खोटा नहीं होता!
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ओर अब हमारी ममता सोनिया से मिलने आयी है ……नैनो के लिए नानी (छोटी) पोस्ट
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आप नैनो या माइक्रो लिखे आप अपनी बात कह जाते है ।नैनो के बहाने बात बड़ी कर गये आप. वैसे व्यक्तिगत तौर पर मुझे लगता है कि अपनी बात कहने के लिए जितने बड़े मे खुद की बात खुद को स्पष्ट हो जाये, बस उतना ही लिखना पर्याप्त है. किन्तु जिस तरह बातचीत में वैसे ही लेखन में, कोई दो शब्दों में अपनी बात समझा जाता है तो कोई १०० में भी नहीं कह पाता और इस हिसाब से लेखक के लेखन का एक लगभग स्टैन्डर्ड साईज सा बन जाता है. मात्र मेरी सोच है.agree ।
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