डाक्टर पासी के बैल


वह अपने बैलों के साथ आ रहा था। दोनों बैलों की जोड़ी। काला और सफ़ेद। उनके ऊपर जुआ रखा था। आजकल के ट्रेक्टरहे युग में यह दृष्य असामान्य था। पहले तो मैने उसका चित्र लिया; फिर अपनी साइकिल रोक दी। कहां जा रहे हो, ये बैल ले कर?  खेत जोतने। अपना खेत। दो ढाई बीघाContinue reading “डाक्टर पासी के बैल”