हरामी कोई गाली है?


गांवदेहात डायरी साइकिल से देखा गांव  सुबह की हल्की धूप बरियापुर पर पड़ रही है।जीवन लाल, तीस-बत्तीस साल का दुबला-पतला नौजवान, खादी जैसी कमीज़ और गले में काला बैग टाँगे साइकिल पर बैठता है। बैग में फाइलें, एक रजिस्टर, कैलकुलेटर और अब तो एक स्मार्टफोन भी—जिससे वह कैशपोर के माइक्रोफिनांस ग्रुप की उपस्थिति और कलेक्शनContinue reading “हरामी कोई गाली है?”

नीलकंठ के कयास


[ नीलकंठ एक मानसिक चरित्र है। वह गंगा किनारे बरियापुर में रहता है। गंगा वहां मनोरम दृष्य बनाती हैं— यू टर्न इस तरह लेती हैं कि वहां घाट से सूर्योदय और सूर्यास्त, दोनो गंगा के जल में होते दिखते हैं। रेलगाड़ियों के प्रबंधन से थका नीलकंठ वहां एक रिटायर्ड होम में अगली पारी जी रहाContinue reading “नीलकंठ के कयास”

ट्रेवलिंग डेंटल टेक्नीशियन: इरशाद अहमद की कहानी


जो दांत बनारस में बनाते हैं और मुस्कान महराजगंज में लगाते हैं डॉक्टर के क्लीनिक की गैलरी में एक आदमी बैठा था। हाथ में दांत का ताजा इम्प्रेशन लिए। मैं वहां अपनी बारी का इंतजार कर रहा था। वही आदमी इरशाद थे — दांत के टेक्नीशियन। पिछले डेढ़ महीने में दांत के डॉक्टर साहब केContinue reading “ट्रेवलिंग डेंटल टेक्नीशियन: इरशाद अहमद की कहानी”

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