सवेरे की साइकिल सैर का मजा


गांवदेहात डायरी सवेरे सवा सात बजे घर से निकलता हूं बिजली की साइकिल पर। तापक्रम 28 डिग्री के आसपास और हवा भी (अपेक्षाकृत) साफ। घूमने का मजा ऐसे ही मौसम में है। यातायात कम होता है। हाईवे की सर्विस लेन पर चारपहिया वाहन लगभग नहीं के बराबर। ज्यादातर लोग साइकिल पर अपने छोटे बर्तन मेंContinue reading “सवेरे की साइकिल सैर का मजा”

होरमुज़ से गुजरते जहाज का स्वप्न


गांवदेहात डायरी खाड़ी युद्ध के चक्कर में आजकल बाहरी समाचार पत्रों का पठन बढ़ गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स, वाल स्ट्रीट जर्नल और वाशिंगटन पोस्ट तो नियमित देखता ही हूँ। उनकी रिपोर्टिंग, विश्लेषण और एडीटोरियल कंटेंट प्रभावित करते हैं। हमारे यहाँ के अखबार प्रायः वही बातें उठा कर छापते नज़र आते हैं। उनका अपना मौलिक लगभगContinue reading “होरमुज़ से गुजरते जहाज का स्वप्न”

निबड़ियाघाट का पीपे का पुल


गांवदेहात डायरी सत्तर की उम्र में पैडल चला कर गया पचेवरा तक। जाने में 16 और आने में 9 किलोमीटर। मौसम ठीक था, फिर भी लगा कि पानी की बोतल साथ ले गया होता तो बेहतर होता। मुझे आशा नहीं थी कि कुछ अलग देखने को मिलेगा। वही टूटी सड़क, वही ईंट-भट्ठे पर काम करतेContinue reading “निबड़ियाघाट का पीपे का पुल”

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