पिछले शनिवार को मैं लोकभारती प्रकाशन की सिविल लाइंस, इलाहाबाद की दुकान पर गया था। हिन्दी पुस्तकों का बड़ा जखीरा होता है वहां। बकौल मेरी पत्नी "मैं वहां 300 रुपये बर्बाद कर आया"। कुल 5 पुस्तकें लाया, औसत 60 रुपया प्रति पुस्तक। मेरे विचार से सस्ती और अच्छी पेपरबैक थीं। हिन्दी पुस्तकें अपेक्षाकृत सस्ती हैं।Continue reading “पीढ़ियों की सोच में अंतर”
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डिवाइडर पर सोने वाला कहाँ सोयेगा?
कुछ दिन पहले मैने पोस्ट लिखी थी उस व्यक्ति के बारे में जो रात में भरे यातायात के बीच राणाप्रताप चौराहे पर रोड-डिवाइडर पर सो रहा था। उसकी गहरी नींद और अपनी नींद की गोली गटकने पर भी न आने वाली नींद की चर्चा मैने उस पोस्ट में की थी। आज सवेरे दफ्तर जाते समयContinue reading “डिवाइडर पर सोने वाला कहाँ सोयेगा?”
एक कतरा रोशनी
मेरे घर में मेरे सोने के कमरे में एक जरा सा रोशनदान है। उससे हवा और रोशनी आती है और वर्षा होने पर फुहार। कमरे का फर्श और कभी-कभी बिस्तर गीला हो जाता है वर्षा के पानी से। एक बार विचार आया था कि इस गलत डिजाइन हुये रोशनदान को पाट दिया जाये। पर परसोंContinue reading “एक कतरा रोशनी”
