चारवाक का युग आ गया है!


“जीवन का क्या भरोसा। जितना सामने है, उसका आनंद लो। कुछ नहीं है तो ऋण लेकर घी पियो।” चारवाक ने यह बात बहुत पहले कह दी थी। तब शायद किसी ने गंभीरता से नहीं ली। आज लग रहा है — आदमी नहीं बदला, बस साधन बदल गये हैं। घी अब भी है, ऋण भी है;Continue reading “चारवाक का युग आ गया है!”

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