ढाई हजार घरों की चाय


[ छियालीस साल हो गये हमारी शादी को। याद नहीं आता कि किसी ने सालगिरह के अवसर पर उपहार दिया हो। इस बार उन लोगों ने दिया जो शादी के समय तो हो नहीं सकते थे — हमारे बिटिया और दामाद ने!  उपहार था एक माइक्रोवेव ओवन। ]  उसे इंस्टॉल करने दो दिन बाद आएContinue reading “ढाई हजार घरों की चाय”

आँधी, आम और डालें


परसों शाम अचानक आँधी आई। अस्सी किलोमीटर की रफ़्तार से धूल भरी — घटाटोप अँधेरा छा गया। अभी एक घंटा बचा था सूरज ढलने में, पर रोशनी इतनी कम कि लगे रात के आठ बज गये। हमने सारी खिड़कियाँ-दरवाज़े बंद किये। ड्राइवर अशोक को कहा कि वह अंदर आ कर बैठ जाये। पर उसने बतायाContinue reading “आँधी, आम और डालें”

दो साइकिलों की कहानी


बटोही ने पहले गाँव-देहात दिखाया। दस किलोमीटर की परिधि में — शरबतखानी से जगतानंद धाम, पचेवरा से गिर्दबड़गांव — सब उसके साथ नापा। वह अब भी नाप सकती है। पर मेरे घुटने अब उतनी मेहनत की इजाज़त नहीं देते। इसीलिये ईबटोही आई। बटोही अब दूसरे रोल में है। रोज़ चालीस-साठ मिनट घर-परिसर में गोल-गोल चक्कर।Continue reading “दो साइकिलों की कहानी”

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