"यह पौधा मानवता का रक्षक बनेगा"!(?)


जट्रोफा से बायो डीजल बनाने पर बहुत सारे मित्र लोग बहुत कुछ कह चुके हैं. पंकज अवधिया (दर्द हिन्दुस्तानी) जी ने तो मुझे बहुत सामग्री भी दे दी थी यह बताते हुये कि इस खर-पतवार में बुरा ही बुरा है, अच्छा कुछ भी नहीं. पर दो दिन पहले फ्रीकोनॉमिक्स ब्लॉग में एक पोस्ट है. उसमेंContinue reading “"यह पौधा मानवता का रक्षक बनेगा"!(?)”

एसएमएस आर्धारित भुगतान व्यवस्था


मैने 8 मई’2007 को एक पोस्ट लिखी थी : पैसे ले कर चलना खतरनाक है. इस पोस्ट में मैने कहा था कि रोकड़ ले कर चलना/भुगतान करना उत्तरोत्तर जोखिम भरा होता जा रहा है. “द मेकेंजी क्वाटर्ली” के एक लेख के अनुसार या तो एटीएम की श्रृंखला या एसएमएस आर्धारित भुगतान व्यवस्था इसका उपाय है.Continue reading “एसएमएस आर्धारित भुगतान व्यवस्था”

अ बिजनेस इज अ बिजनेस – गलत क्या है?


जो शीर्षक दिया है, वह हिन्दी अंग्रेजी घालमेल वाला हो गया है. इतना हिन्दी रखी है कि हिन्दी वाले नाक-भौं न सिकोड़ें. अन्यथा शीर्षक रखने का विचार था – अ बिजनेस इज़ अ बिजनेस इज़ अ बिजनेस – व्हाट्स रॉंग अबाउट इट! यह प्रतिक्रिया दिल्ली में ब्लॉगरों के जमावड़े के बारे में पढ़ कर है.Continue reading “अ बिजनेस इज अ बिजनेस – गलत क्या है?”

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