एसएमएस आर्धारित भुगतान व्यवस्था


मैने 8 मई’2007 को एक पोस्ट लिखी थी : पैसे ले कर चलना खतरनाक है. इस पोस्ट में मैने कहा था कि रोकड़ ले कर चलना/भुगतान करना उत्तरोत्तर जोखिम भरा होता जा रहा है. “द मेकेंजी क्वाटर्ली” के एक लेख के अनुसार या तो एटीएम की श्रृंखला या एसएमएस आर्धारित भुगतान व्यवस्था इसका उपाय है.Continue reading “एसएमएस आर्धारित भुगतान व्यवस्था”

अ बिजनेस इज अ बिजनेस – गलत क्या है?


जो शीर्षक दिया है, वह हिन्दी अंग्रेजी घालमेल वाला हो गया है. इतना हिन्दी रखी है कि हिन्दी वाले नाक-भौं न सिकोड़ें. अन्यथा शीर्षक रखने का विचार था – अ बिजनेस इज़ अ बिजनेस इज़ अ बिजनेस – व्हाट्स रॉंग अबाउट इट! यह प्रतिक्रिया दिल्ली में ब्लॉगरों के जमावड़े के बारे में पढ़ कर है.Continue reading “अ बिजनेस इज अ बिजनेस – गलत क्या है?”

इण्डियन एक्स्प्रेस हाजिर हो!!!


अरुण शौरी के जमाने से इण्डियन एक्स्प्रेस मेरा पसन्दीदा अखबार है. मैं 2003-04 में गोरखपुर में था. इण्डियन एक्स्प्रेस एक दिन देर से मिलता था, फिर भी मैने उसे जारी रखा. पर जब एक दिन बाद भी उसकी सप्लाई अटकने लग गयी तो जा कर अपनी लॉयल्टी बदली. अब भी मैं नेट पर इण्डियन एक्स्प्रेसContinue reading “इण्डियन एक्स्प्रेस हाजिर हो!!!”

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