सरकारी अफसर की साहित्य साधना


श्रीलाल शुक्ल सरीखे महान तो इक्का-दुक्का होते हैं.ढेरों अफसर हैं जो अपनी प्रभुता का लाभ ले कर – छोटे दायरे में ही सही – साहित्यकार होने की चिप्पी लगवा लेते हैं. सौ-सवासौ पेजों की एक दो किताबें छपवा लेते हैं. सरकारी प्रायोजन से (इसमें राजभाषा खण्ड की महती भूमिका रहती है) कवि सम्मेलन और गोष्ठीContinue reading “सरकारी अफसर की साहित्य साधना”

‘अहो रूपम – अहो ध्वनि’, चमगादड और हिन्दी के चिट्ठे


इंटरनेट की जाली पर कई अलग अलग समूहों मे अनेक प्रजातियों के चमगादड़ लटक रहे हैं. ये चमगादड़ तेजी से फल फूल रहे हैं. इनमें से एक प्रजाति हिंन्दी के चिट्ठाकारों की है. उनकी कालोनी का दर्शन मै पिछले दो दिनों से कर रहा हूं. ये चमगादड़ बुद्धिमान टाइप के हैं. आपस में ‘अहो रूपमContinue reading “‘अहो रूपम – अहो ध्वनि’, चमगादड और हिन्दी के चिट्ठे”

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free