<<< कटका में अटकी ट्रेनें >>> कल मौनी अमावस्या के संगम स्नान के समय से रेल यातायात ठिठक सा गया है। पिछली शाम को प्रयाग जाने वाली एक मेला स्पेशल पांच घण्टा खड़ी रही। उसके बाद भी सभी मेला स्पेशल या लम्बी दूरी की ट्रेनें एक दो घण्टा खड़ी रह कर ही आगे जा पाContinue reading “कटका में अटकी ट्रेनें”
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गिलहरियां नहीं दिख रहीं
<< गिलहरियां नहीं दिख रहीं >> रात में कुछ अजीब हुआ है। आज सवेरे कोई गिलहरी नहीं दिख रही। मेरे #घरपरिसर में करीब दो दर्जन गिलहरियां हैं। सवेरे बाहर निकल कर मैं उनके लिये रोटी डालता हूं तो कई गिलहरियां, चरखियां, मैना, बुलबुल, कौव्वे और रॉबिन इंतजार करते मिलते हैं। आज बाकी सब तो थेContinue reading “गिलहरियां नहीं दिख रहीं”
संगम में भटका भल्लू
<< संगम में भटका भल्लू >> गांव का ही है भल्लू। भल्लू कंहार। उससे मैं तीन दिन से मिलना चाहता हूं पर मिलना नहीं हो रहा। वह सवेरे सात बजे काती के कारखाने पर चला जाता है और रात आठ बजे के बाद वापस आता है। कार्पेट बुनकर के कारखाने में लोग दो तरह सेContinue reading “संगम में भटका भल्लू”
