निरापद लेखन


ट्यूबलाइटीय रेवलेशन: हिंसक प्रजातियों की बजाय सांप, शेर, कुकुर और बिलार पर लिखना निरापद है और उसमें भी पर्याप्त बौद्धिकता ठेली जा सकती है। तदानुसार लेखन: हजारीप्रसाद द्विवेदी की कबीर पर लिखी पुस्तक ढूंढी जा रही थी। काफी ढूंढने पर पता चला कि गोलू पांड़े एक कोने में बैठे उसका अध्ययन कर रहे हैं। आधेContinue reading “निरापद लेखन”

ब्लॉग से दूर!


मैं इण्टर-नेट से लगभग चार दिन दूर रहूंगा। कभी कभी अन्य जिम्मेदारियां आपको बाकी काम का महत्व ज्यादा होने का अहसास देती हैं। और आप व्यस्तता होने पर पूरी इमानदारी से सरेण्डर कर देते हैं समय को। बीच-बीच में साक्षी भाव लाते हुये। यही सही अप्रोच है न?  खैर यह गोलू पांड़े को सरेण्डर कीContinue reading “ब्लॉग से दूर!”

समीरलाल का आंकड़ा


श्री समीर लाल की २८३ वी पोस्ट “किसी ने देखा तो नहीं” पर जब मैने टिप्पणी की तो वह ६५वीं थी। इसे ले कर उनके ब्लॉग पर ९९९८ टिप्पणियां हो चुकी हैं। जब तक मैं सो कर उठूं, दस हजार पार तो हो ही जायेंगी। अब मैं सोने जा रहा हूं।   आप दन्न से बजायेंContinue reading “समीरलाल का आंकड़ा”

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free