मैंने उन दोनों को सवेरे दूध लेकर आते देखा था। एक अधेड़ या बुढ़िया और दूसरी लड़की। महिला की पीठ उम्र से झुक गई थी। लड़की के चेहरे पर दुनिया को देखने की बालसुलभ जिज्ञासा थी। दोनों ही गरीब या गरीबी की सबसे निचली पायदान पर। मैं बिजली वाली साइकिल से था तो चलता चलाContinue reading “भीख मांगने वाली — पूजा और मंदिर”
