पत्नी को पीटना क्या सहज व्यवहार है?


मेरी पत्नी जी की पोस्ट पर देर से आई दो टिप्पणियां विचार करने को बाध्य करती हैं। सम्भव है कि बहुत से लोग उस पोस्ट पर अब न जायें, इस लिये इस पोस्ट को लिखने की जरूरत पड़ी। पत्नी को पीटना, या शराब पी कर पीटना (जिसमें बहाना रहता है कि आदमी अपने होश हवासContinue reading “पत्नी को पीटना क्या सहज व्यवहार है?”

छोटी चोरी के बड़े नुकसान


सार्वजनिक सम्पत्ति बड़ा सॉफ्ट टार्गेट है – उपद्रवियों का भी और छुद्र चोरों का भी। मेरा संस्थान (रेलवे) उसका बड़ा शिकार होता है। पिछले महीने से मैं इस छुद्र चोरी का दुष्परिणाम एक प्रबन्धक के तौर पर भुगत रहा हूं। रेलवे के सिगनल सिस्टम की संचार केबल ट्रैक के किनारे बिछी रहती है। जहां जमीनContinue reading “छोटी चोरी के बड़े नुकसान”

गालिब या मीर – मुझे तो लोग जमे ब्लॉगरी-ए-हिन्दी में!


शिवकुमार मिश्र लिखते हैं एक पोस्ट – तुम मीर हो या गालिब? और लगता है कि हम लोग जनाब राजेश रोशन जी को अहो रूपम- अहो ध्वनि वाले लगते हैं! अर हम लोग हैं भी! नहीं तो इस ब्लॉगरी में समय लगाने कौन आये! मैं अपनी कई पोस्टों में इस फिनॉमिना के बारे में लिखContinue reading “गालिब या मीर – मुझे तो लोग जमे ब्लॉगरी-ए-हिन्दी में!”

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free