साइकिल के कैरियर पर घोड़जई


गांवदेहात डायरी रास्ते में एक साइकिल-ठेले पर सरसों की कटी बालें थीं। उनके ऊपर आड़े तरीके से कुछ खरपतवार रखा था। मैंने ठेले का चित्र रुक कर लिया। बाद में जब पंकज अवधिया जी के घर उनसे मिला तो फोटो दिखा कर पूछा—यह घास क्या है? “और तो खरपतवार है, पर घोड़जई की बालें भीContinue reading “साइकिल के कैरियर पर घोड़जई”

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