श्री त्रिस्त्रोता शक्तिपीठ और आगे


“भईया यहां सांप बड़े बड़े दिखे। सोपारी की भी खेती होती है। सागौन के जंगल भी बहुत दिखे। बांस का भी खूब इस्तेमाल दिखा। नहर जो महानंदा को तीस्ता से जोड़ती है उसमें पानी महानंदा की ओर से तीस्ता की ओर बह रहा था।”

भगबती से फुलबारी – नहर के किनारे किनारे


फुलबारी में उन्हें अपने लिये लॉज तलाशनी पड़ी। “पांच सौ रुपये में रात गुजारने का कमरा मिला भईया। थाली का रेट पूछा तो माथा घूम गया। तीन सौ रुपये की थाली। मैने तो अलग अलग आईटम ले कर डेढ़ सौ में रात का भोजन किया।

जीवन पाल जी का चाय बागान


प्रेमसागर खेत के बीच भी हिल कर चाय की पत्तियों को परखे और उनकी गंध से परिचित हुये। “भईया मैं आपके लिये यहां से एक किलो चाय ले कर आऊंगा। एक किलो तैयार की हुई फेक्टरी से निकली चाय और कुछ चुनी हुई चाय की पत्तियां भी।…”

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