नारद का कलेवर अखबार जैसा करें जनाब!


मैं अखबार के स्पोर्ट्स और फिल्म के पन्ने पर शायद ही जाता होऊं. भरतलाल (मेरा भृत्य) केवल फिल्म के पन्ने निहारता है. नगर/महानगर/अंचल की खबरें मेरे पिताजी पढ़ते हैं. यानि हर एक की पसन्द का अपना पन्ना. अखबार को ले कर घर में कोई चौंचियाहट नहीं है. वही हाल नारद का होना चाहिये. हिन्दू काContinue reading “नारद का कलेवर अखबार जैसा करें जनाब!”