यदि हमारे पास यथेष्ट चरित्र न हो — २


(कल से आगे—) यदि हमारे पास यथेष्ट चरित्र न हो, तो छात्रो‍ के रूप मे‍ हम गम्भीर अध्ययन के कालयापन के स्थान पर अपने पाठ्यक्रम से अलग की गतिविधियो‍ मे‍ ही अधिक रुचि लेंगे और हम ऐसे विचारो‍ तथा कार्यों मे‍ व्यस्त रहेंगे, जो हमारे जीवन कालिका को गलत आकार देंगे और इसके फ़लस्वरूप हमContinue reading “यदि हमारे पास यथेष्ट चरित्र न हो — २”