The World Is Wrinkled — थॉमस फ्रीडमैन की पुस्तक पर सीक्वेल 


फ्रीडमैन ने दुनिया को वहाँ से देखा जहाँ नई सड़कें बन रही थीं। मैं उसे वहाँ से देख रहा हूँ जहाँ उन सड़कों पर चलते वाहनों ने पैदल चलने की ताकत घटा दी है। थॉमस फ्रीडमैन का ताजा लेख है न्यूयॉर्क टाइम्स में – Everybody Is a Loser in This Middle East War. वह लेखContinue reading “The World Is Wrinkled — थॉमस फ्रीडमैन की पुस्तक पर सीक्वेल “

कक्षा 8 में जाने का अनुभव


कक्षा आठ में जाने का अनुभव मेरे जीवन का एक बहुत खास और यादगार समय था। इसमें मेरे मन में एक साथ कई तरह की भावनाएँ चल रही थीं—डर, खुशी, उत्साह और थोड़ा सा दुख भी। कक्षा शुरू होने से एक दिन पहले रात को मैं बिल्कुल ठीक से सो नहीं पा रही थी। मैंContinue reading “कक्षा 8 में जाने का अनुभव”

कोहरा – साइकिलवाद से पैदलवाद की ओर


<<< कोहरा – साइकिलवाद से पैदलवाद की ओर >>> नये साल का संकल्प कि रोज दस हजार से ज्यादा कदम चलना है; सिर मुड़ाते ही ओले पड़ने जैसा कुछ साबित हुआ। साल की शुरुआत ही मौसम के खराब होने और कोहरा गहराने से हुई। साइकिल चलाना तो कोहरे में सही नहीं था, घर परिसर मेंContinue reading “कोहरा – साइकिलवाद से पैदलवाद की ओर”

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