यह कटिंग मैने बीबीसी हिन्दी की साइट से उतारी है। मुझे यह नहीं मालुम कि नेपाल में क्या होने जा रहा है। पर यह अच्छा लगा कि सेना में माओवादी दखलंदाजी को नेपाल की जनता ने सही नहीं माना।
दहाल ने कहा; "मैंने (नेपाल के) प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। राष्ट्रपति का क़दम असंवैधानिक और लोकतंत्र के ख़िलाफ़ है। देश का अंतरिम संविधान राष्ट्रपति को एक समांतर शक्ति के रूप में काम करने की अनुमति नहीं देता।" अगर राष्ट्रपति असंवैधानिक हैं तो दहाल उन्हे हटाने का उपक्रम करते। इस्तीफा का मतलब तो राष्ट्र उनके साथ नहीं है।
भारत में भी अनेक प्रधानमन्त्री पद के उम्मीदवारों की बात है। साम्यवादी प्रधानमन्त्री भी उसमें चर्चा में हैं। अगर वैसा हुआ तो भारतीय सेना में भी साम्यवादी दखल सम्भव है? कल्पना करना बहुत प्रिय नहीं लगता।

प्रचंड लोकतंत्र के लबादे में अपना खालिस माओवादी राज चाहते हैं, लोकतंत्र उनके लिए इस्तेमाल से ज्यादा की वस्तु नहीं है। नेपाल की जनता को तय करना है कि फर्जी लोकतंत्र चाहिए या अपने हिसाब का लोकतंत्र।
LikeLike
भारत मे साम्यवाद प्रचंड समस्या है . नेताजी सुभाष बाबु को तोजो का कुत्ता कहने वाले किसी भी हद तक जा सकते है . लेकिन खुदा गंजे को नाखून न दे
LikeLike
I am happy Prachanda resignedHis proposal to induct guerillas into the army was absurd to the extreme.The army in any country is a trained and disciplined force.Selection is by merit.Bringing in riff raff from the streets was shocking.Let this be an example.No country should agree to such nonsense.Who knows, tomorrow if this happens in Pakistan, Zardari may be asked to admit Talibanis into the armed forces.Nepal has been saved.
LikeLike
सेना में राजनीतिक दखल देश को अस्थिर और कमजोर कर देता है। भारत में साम्यवाद है ही कहां :)
LikeLike
नेपाल में परिवर्तन की प्रक्रिया चल रही है, वर्तमान घटना क्रम उसी का एक अंग है। वहाँ विभिन्न शक्तियाँ संघर्षरत हैं। इन घटनाओं से क्या निकल कर आएगा? यह अभी भविष्य के गर्भ में छुपा है। माओवादी लड़ाकों को सेना में स्थान देने के प्रश्न पर वर्तमान घटनाओं को जन्म दिया है। पर उन्हें क्या बाहर रखा जा सकता है? इन्हें बाहर रख कर क्या देश में सत्ता के दो केंद्र न हो जाएंगे? या फिर इस का विकल्प क्या है?
LikeLike
आदरणीय पांडेय जी ,भारत में कौन प्रधानमंत्री बनेगा ..कहा नहीं जा सकता .लेकिन मैं भी आपकी इस बात से सहमत हूँ कि सेना में साम्यवादी दखल ………ईश्वर हे मालिक रहेगा.हेमंत कुमार
LikeLike
ज्ञान जी रह रह कर विदेश यात्रा पर चल निकलते हैं ! यह उनकी ख़ास अदा है !
LikeLike
चलो किसी प्रधानमंत्री ने कुछ दिया तो सहीचाहे इस्तीफा हीनहीं तो प्रधानमंत्री हों या मंत्री अथवा संतरीसब यकीन लेने में ही रखते हैंचाहे मिलें नोट या लेने हों वोटलेने नहीं हथियाने।
LikeLike
ज्ञानदत्त भाई,सेना के नियमित एवं निर्धारित क्रिया कलाप में किसी के भी दखल देने के विरोध में तो बात समझ में आती है लेकिन आपको केवल साम्यवादी दखल की सम्भावना ही अप्रिय क्यों लग रही है?सादर श्यामल सुमन 09955373288 http://www.manoramsuman.blogspot.comshyamalsuman@gmail.com
LikeLike
ऐसी अनेकों सम्भावनायें जन्म ले रही हैं जिनके बारे में कल्पना करना भी प्रिय नहीं लगता, उन्हीं में से यह भी एक है.
LikeLike