पतझड़

कब होता है पतझड़?
ऋतुयें हैं – ग्रीष्म, वर्षा, शरद, शिशिर, हेमन्त वसन्त। पतझड़ क्या है – ऑटम (Autumn) शरद भी है और हेमन्त भी। दोनो में पत्ते झड़ते हैं।

झरते हैं झरने दो पत्ते डरो न किंचित। रक्तपूर्ण मांसल होंगे फिर जीवन रंजित। 

यह ट्विटरीय बात ब्लॉग पोस्ट पर क्यों कर रहा हूं? अभी उपलब्धि/लेखन/पठन के पतझड़ से गुजर रहा हूं। देखें कब तक चलता है!
Autumm
औरों की ब्लॉग पोस्टें देखता हूं – सदाबहार नजर आती हैं। चहकते, बहकते लोग। धर्म के नाम पर धर्म से लड़ते लोग। कविता कहते सुनते वाहावाही करते लोग। कैसे लोग बाईपास कर जाते हैं शरद और हेमन्त को और सदा निवसते हैं वसन्त में!


Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring rural India with a curious lens and a calm heart. Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges. Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh. Writing at - gyandutt.com — reflections from a life “Beyond Seventy”. FB / Instagram / X : @gyandutt | FB Page : @gyanfb

36 thoughts on “पतझड़

  1. जीवन मे पतझड् का कोई समय नहीं होता हम तो रोज़ बसंत समझ कर जीते हैं। इस लिये हंसते हैं मुस्कुराते हैं और टिप्पियाते हैं। आशा करते हैं कि आपका ब्लाग भी सद बसंत मनाता रहे

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  2. पतझड भी अच्छा लगता है जी।कुछ रंग, खुशबुएं और संगीत केवल पतझड में ही होते हैं। इसके अलावा एक आशा कि नई कोंपलें आने वाली हैं।वैसे आपके ब्लाग पर तो कभी पतझड नही आता, फिर यह हलचल क्यूं ? प्रणाम स्वीकार करें

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  3. पतझड़ नये के आने के स्वागत में अपना स्थान छोड़ देता । ब्लॉग के क्षेत्र में नयी पोस्ट के साथ बसन्त होता है और अगली पोस्ट आने के पहले पतझड़ ।नयी पौध/पोस्ट में कविता का उदयमेरी भी छोटी आहुतिपत्ते टूटेंगे पेड़ों से,निश्चय द्रुतवेग थपेड़ों से,आहत भी आज किनारे हैं,सब कालचक्र के मारे हैं,क्यों चित्र यही मन में आता,जीवन गति को ठहरा जाता,व्यवधानों में जलता रहता, मैं दिशा-दीप का वादी हूँ।मैं उत्कट आशावादी हूँ।।३।।

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  4. @ श्रीश पाठक – बात में कोई पर्त नहीं, सरल सी है! आत्मकेन्द्रित सी। और अबूझ की बात ही नहीं, हाइपरबोल में लेखन तो एक आध बार छोड़ कभी नहीं किया। उससे पाठक नहीं मिलते!

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  5. "धर्म के नाम पर धर्म से लड़ते लोग।"धर्म के नाम पर कौन लड़ रहा है?किसने शुरू की ये लड़ाई?कोई जानबूझ कर हमें अपमानित करे और हम चुप रहें?चुपचाप अपमानित होते रहना क्या उचित है?क्या रामचरितमानस में लिखा "जिन मोहि मारा ते मैं मारे" गलत है?क्या कृष्ण का अर्जुन को उपदेश "शस्त्र उठा …" गलत है?

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  6. सब अपना एक बसंत लेकर जीते है.. सब अपना एक पतझड़ लेकर जीते है..

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  7. कैसे लोग बाईपास कर जाते हैं शरद और हेमन्त को और सदा निवसते हैं वसन्त में! वाह क्या सत्योक्ति है…ऐसा लगा आप ने मेरे दिल की बात कह दी हो…

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  8. Gyandutt sir,Can't say bout rest of all, however I still remember those old golden days when there use to be 10-12 days festival in our small town .It Was called 'Sharadotasav'.or 'Automn Festival' or simply 'Automn'.What the great fun that was !!PS: Good that you are using twitter it's a fastest growing networking iste(tough i doubt that it's networking site).People also call it SMS Of internet.

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