रेत, वैतरणी नाला और बन्दर पांड़े


कभी कभी गठी हुई पोस्ट नहीं निकलती सवेरे की गंगा किनारे की सैर में। या फिर सन के रेशे होते हैं पर आपका मन नहीं होता उसमें से रस्सी बुनने का। पर सन के रेशों की क्वालिटी बहुत बढ़िया होती है और आप यूं ही फैंक नही सकते उन रेशों को। सो बनती है गड्डमड्डContinue reading “रेत, वैतरणी नाला और बन्दर पांड़े”

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