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चिठ्ठाचर्चा डॉट फलाना : असली और मोस्ट हाइटेक! उत्कृष्टता की एक मात्र दावेदार दुकान!!
:-) :-(
भारतीय रेल का पूर्व विभागाध्यक्ष, अब साइकिल से चलता गाँव का निवासी। गंगा किनारे रहते हुए जीवन को नये नज़रिये से देखता हूँ। सत्तर की उम्र में भी सीखने और साझा करने की यात्रा जारी है।
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चिठ्ठाचर्चा डॉट फलाना : असली और मोस्ट हाइटेक! उत्कृष्टता की एक मात्र दावेदार दुकान!!
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आदरणीय ज्ञान दत्त जी !आपके ब्लॉग पर मेरे जैसा अदना सा ब्लोगर शायद यह पहली टिपण्णी दे रहा है !नि:संदेह आप बहुत ही उत्कृष्ट लिखते है, इसलिए मैं तो आपके ब्लॉग पर टिपण्णी देने से भी डरता हूँ ! शायद आज भी नहीं देता, लेकिन चूँकि यह तमाम ब्लोगरो से जुडा मसला है, इसलिए दो शब्द कहना चाहता हूँ ! हर इंसान की अपनी-अपनी विशेषताए होती है, कोई बहुत ही उम्दा और साहित्यिक लिखना जानता है, कोई मार्मिक लिखना जानता है कोई रचनात्मक लिखना जानता है और इसलिए वह ब्लॉग का इस्तेमाल कर उसे लिखता है, लेकिन एक वर्ग ऐसा भी होता है जो खुद इन विशेषताओं को तो नहीं रखता, मगर उसे लिखने का शौक है ! और वह किसी तरह लेखन से जुड़े रहकर अपने इस शौक को पूरा करता है ! वह दूसरो के लिखे को पढता है, और उसे कहीं संगृहीत करता है चिट्ठा चर्चा अथवा किसी और नाम से ! ज्यादा लंबा न खींचकर संक्षेप में कहूंगा कि मान लीजिये मेरे दस मित्र ब्लोगर है जो काफी उम्दा लिखते है और मुझे लिखना नहीं आता लेकिन मैं उनके लेखो को पढ़कर उन्हें एक चर्चा कह लीजिये या फिर मन की तस्सली कह लीजिये, मगर एक जगह कुछ ख़ास उसमे से संगृहीत करता हूँ चिठ्ठा चर्चा के माध्यम से ! तो मैं यह समझ पाने में असमर्थ हूँ कि अगर मैं ऐसा कर रहा हूँ तो इसमें किसी को क्या दिक्कत ? कोई अगर अच्छा लेखक, कवि या रचनाकार होगा और उसके लेख या रचना को यदि उस चर्चा में जगह न मिल रही हो तो उसके लिए चिठाचर्चाकार वाध्य तो नहीं है ? हमारी जो विशेषताए है वो हमारे पास है उसे कोई छीन तो नहीं रहा ? मैंने यह सवाल अपनी अक्ल के हिसाब से सार्वजनिक तौर पर सभी से पूछे है , आप इसे कदापि व्यक्तिगत तौर पर न ले ! धन्यवाद !गोदियाल
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बढ़िया मजाक उड़ाया है झंडेवालों का ! और बेहतर होता कि थोडा और लिखते ..!
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ताबूत में आखिरी कील?लगता है अब अपनी चर्चा को गाड़ना ही पड़ेगा :)
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हा हा हा क्या तीर चलाया है निशाने पर बैठेगा?????????????
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ज्ञानदत्त जी तेताला चर्चा को काहे भूल गयेआपको भी निमंत्रण भिजवा देते हैंइसमें चर्चा करने काऔर बिल्कुल ऐसी भी कर सकते हैंजिसमें कर दी जाए ऐसी की तैसीन वैसीन जैसीसिर्फ ऐसी की तैसीतो अपना ई मेलमेरे ई मेल पर फौरन भजेंavinashvachaspati@gmail.comआपके स्नेह सान्निध्य ई मेल कारहेगा इंतजारपर भेज दीजिएगासदा इंतजार ही न बना रहे।
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बोलो चिट्ठा चर्चा की जय बोलो चर्चा करने वालो की जय और साथ ही चिट्ठा लिखने वालो की जय
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वाह सर जी ,क्या खूब ज्वलंत मुद्दे पर लेखनी फिराई है …….काश आपका यह इशारा उन लोंगों की समझ में आ जाये???????
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ओम जय चिट्ठाचर्चा…स्वामी जय चिट्ठाचर्चा….तुम हो एक अखाड़ादंगल खूब रचे…स्वामी दंगल खूब रचे..तुझसे जिक्र में अक्सरकितने नाम बचे…स्वामी कितने नाम बचे!!!तुझसे पंगा लेनेब्लॉगर है डरता..ओम जय चिट्ठाचर्चा…स्वामी जय चिट्ठाचर्चा….तुम पर सबकी नजरेंतुम ही रास रचो..स्वामी तुम ही रास रचोमैं तो बचा हूँ स्वामीतुम भी आज बचो…तुझ पर कितने दावेहर कोई है करता…ओम जय चिट्ठाचर्चा…स्वामी जय चिट्ठाचर्चा….-आदेश होगा तो आगे बढ़ाया जाये और गाकर पॉडकास्ट करुँ. आवाज तो अच्छी है ही..आप तो जानते ही हैं..खैर, आप तो और भी बहुत कुछ जानते हैं. :)
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हम भी यही सोच रहे थे आज ।
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Ha ha ha…
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