गंगा भयीं पोखरा!


पानी कम हो रहा है। कम गंगा में। उभर रहे हैं द्वीप। तट पर कटान करने वाली गंगा अब उथली होती जा रही हैं। माने पोखरा की माफिक! जैसे पोखरा में भैंसे हिलकर बैठती और मड़ियाती हैं, वही दृष्य था। सेम टु सेम। अन्तर इतना भर कि उनके आस पास का जल रुका नहीं, मन्थरContinue reading “गंगा भयीं पोखरा!”

बालम गदेलवा और चील!


बालम मोर गदेलवा बड़ी जबरदस्त फागुनी पोस्ट है। आपे नहीं पढ़ी/सुनी तो वहां हो आइये! हिन्दी ब्लॉगिंग वहां अपनी समग्रता पर है। बाकी, सवाल यह है कि जवान पत्नी का गदेला बालम (बच्चा पति) क्यों होता है? होता जरूर रहा होगा। शायद बेमेल विवाह का यह रिवर्स संस्करण भी समाज की कोई जरूरत रही हो।Continue reading “बालम गदेलवा और चील!”

जो दिखता हूँ, वह लिखता हूँ


प्रवीण पाण्डेय से उनकी पिछली पोस्ट स्ट्रीट चिल्ड्रन के बारे में पूछ लिया गया कि समारोह में मुख्य अतिथि बनने के अलावा आपका योगदान क्या रहा? इस बारे में प्रवीण पाण्डेय ने बहुत गहरे में सोचा। उसके बाद जो ई-मेल मुझे भेजी, वह अपने आप में महत्वपूर्ण पोस्ट है। मैं उस ई-मेल को जस काContinue reading “जो दिखता हूँ, वह लिखता हूँ”

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