कबीर पर जरूरी विजिट


मेरे मित्र श्री सैयद निशात अली ने एल एस.एम.एस. किया है। वह जरूरी है मेरे, आपके, हम सब के लिये।लिहाजा मैं प्रस्तुत कर देता हूं –आदरणीय सर जी,हम आप को और आपके परिवार को बहुत मंगलमय नया वर्ष २०१० एडवान्स में कामना भेजते हैं। यह इस लिये, क्यों कि कबीर दास जी ने कहा था:Continue reading “कबीर पर जरूरी विजिट”

जेल, जेल न रही!


सन 1867 में स्थापित बैंगळुरु की सैंण्ट्रल जेल अब फ्रीडम पार्क में तब्दील हो गयी है। प्रवीण पाण्डेय के सवेरे के भ्रमण का स्थान। इसने ट्रिगर की है यह पोस्ट – जेल से स्वतंत्रता तक की यात्रा की हलचल बयान करती। यह पोस्ट श्री प्रवीण पाण्डेय की बुधवासरीय अतिथि पोस्ट है। प्रवीण बेंगळुरू रेल मण्डलContinue reading “जेल, जेल न रही!”

फेरीवाले


बहुत से आते हैं। बहुत प्रकार की चीजों को बेचते। विविध आवाजें। कई बार एक बार में सौदा नहीं पटता तो पलटकर आते हैं। वे चीजें बेचना चाहते हैं और लोग खरीदना। जबरदस्त कम्पीटीटिव सिनर्जी है कि कौन कितने मुनाफे में बेच सकता है और कौन कितने कम में खरीद सकता है। विन-विन सिचयुयेशन भीContinue reading “फेरीवाले”