लेट थे डाला छठ के सूरज


लगता है रात देर से सोये थे। मेरी तरह नींद की गोली गटक कर। देर हो गयी उठने में सूरज देव को। घाट पर भीड़ को मजे से इन्तजार कराया।

लेकिन थे खूब चटक, लाल। उस अधेड़ मेहरारू की डलिया से लप्प से एक ठोकवा गपके और चढ़ गये आसमान की अटारी पर। हमसे बतियाये नहीं। नहीं तो हम बता देते कि आज वीक-एण्ड है। छुट्टी ले सकते हैं। नहीं तो कैजूअल लीव। उनकी सारी कैजूअल लीव पड़ी हैं। आखिर लैप्स ही तो होनी हैं।

जय सूर्यदेव।