झुलाओ मेरी सजनी, श्याम पड़े पलना


अक्तूबर ३०’२०१२:  दो स्त्रियां यह गीत गाते हुये एक अंगोछे में कुछ (बाल कृष्ण का प्रतीक) झुला रही थीं गंगा किनारे। कोहरा बहुत था। इक्का दुक्का लोग थे स्नान करने वाले गंगा जी के शिवकुटी घाट पर। उनका यह झुलाना और गायन बहुत अच्छा लगा मुझे। पर यह समझ नहीं आया कि ऐसा कर क्योंContinue reading “झुलाओ मेरी सजनी, श्याम पड़े पलना”