मुस्कान


बैशाखी की सुबह थी। एक दिन पहले ही मैने देखा था पानी में पैदल चल कर सात आठ लोग गंगा पार कर टापू पर जा रहे थे सब्जियाँ उगाने के काम के लिये। आज भी मुझे अपेक्षा थी कि कुछ उसी तरह के लोग दिखेंगे। और; वे चिल्ला (गंगा किनारे की बस्ती, जहां वे श्रमिकContinue reading “मुस्कान”