कांवरयात्रा – गंगोत्री से रुद्रप्रयाग और आगे

पांच मई 2022 – गंगोत्री से बौरारी (नई टिहरी शहर)

चार मई को, पिछले दिन की गोमुख की बर्फबारी भरी यात्रा में भीगने के बाद, प्रेमसागर मौनिया बाबा के आश्रम में विश्राम किये। पांच मई को उन्हें चलना था रुद्रप्रयाग के लिये। रुद्रप्रयाग से गंगोत्री की पैदल यात्रा वे कर चुके थे; इसलिये वापसी की यात्रा वाहन के प्रयोग से की। आश्रम के बंधु लोग उन्हें 94 किमी कार में ले कर आये और फिर उन्होने बस पकड़ी। शाम के समय वे नई टिहरी – बौरारी पंहुचे। बस अड्डे के पास ही एक लॉज में रात्रि विश्राम किया। उनके साथ नासिक के दो लोग – भगवान मारुति लाटे और वामन टी राव गायकवाड़ भी थे। इन सज्जनों से उनकी मुलाकात गंगोत्री आश्रम में ही हुई थी; वैसे नासिक में त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन के दौरान प्रेमसागर जहां रुके थे, इन दोनो सज्जनों का गांव/डेरा ज्यादा दूर नहीं था। पर महादेव ने उन्हें मिलाया गंगोत्री में ही।

उनके साथ नासिक के दो लोग – भगवान मारुति लाटे (बांये) और वामन टी राव गायकवाड़ भी थे।

ये दोनो सज्जन भी जाने वाले हैं केदार, पर पैदल नहीं बस में बैठ कर। बौरारी तक का ही उनका साथ प्रेमसागर के साथ था। बौरारी के बाद प्रेमसागर अकेले कांवर पदयात्रा करने वाले हैं केदारनाथ की। उसके बाद प्रेमसागर बदरीनाथ भी जायेंगे। वह यात्रा भी पैदल होगी या वाहन का प्रयोग होगा, मैं अभी नहीं कह सकता। प्रेमसागर से उसके बारे में बात नहीं हुई है।

प्रेमसागर ने बताया कि उत्तराखण्ड में वे हरिद्वार पंहुचे थे। वहां से ऋषिकेश, नीलकण्ठ, देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग, श्रीनगर, चंबा, जमुनोत्री, घरासूपिण्ड और वहां से गंगोत्री पंहुचे थे। गंगोत्री में उनका मुझसे सम्पर्क पुनः हुआ था।

अब नई टेहरी से वे रुद्रप्रयाग बस से जायेंगे। आगे केदार की यात्रा कांवर पदयात्रा होगी।

*** द्वादश ज्योतिर्लिंग कांवर पदयात्रा पोस्टों की सूची ***
प्रेमसागर की पदयात्रा के प्रथम चरण में प्रयाग से अमरकण्टक; द्वितीय चरण में अमरकण्टक से उज्जैन और तृतीय चरण में उज्जैन से सोमनाथ/नागेश्वर की यात्रा है।
नागेश्वर तीर्थ की यात्रा के बाद यात्रा विवरण को विराम मिल गया था। पर वह पूर्ण विराम नहीं हुआ। हिमालय/उत्तराखण्ड में गंगोत्री में पुन: जुड़ना हुआ।
पोस्टों की क्रम बद्ध सूची इस पेज पर दी गयी है।
द्वादश ज्योतिर्लिंग कांवर पदयात्रा पोस्टों की सूची

मैं गंगाजी की यात्रा के मार्ग को गूगल मैप पर ट्रेस करता हूं। गोमुख से भागीरथी निकल कर गंगोत्री होते हुये देवप्रयाग पंहुचती हैं। वहां उनमें अलकनंदा आ कर मिलती हैं। इनके मिलन से देवप्रयाग संगम के बाद उनका नाम गंगा हो जाता है।

इस संगम के पहले रुद्रप्रयाग में भी एक संगम है। वहां मंदाकिनी नदी अलकनंदा में आ कर मिलती हैं। और आगे रुद्रप्रयाग से देवप्रयाग तक उनका नाम अलकनंदा रहता है। प्रेमसागर मुझे देवप्रयाग के अलकनंदा और भागीरथी संगम के चित्र नहीं दे पाये। शायद उनके मोबाइल में से डिलीट हो गये हैं। प्रेमसागर अपने मोबाइल में सम्भवत: पहले की यात्रा के चित्र भी डिलीट कर चुके हैं। नागेश्वर तीर्थ तक के चित्र तो मेरे ब्लॉग पर मिल सकते हैंंउसके बाद त्र्यम्बकेश्वर, भीमाशंकर, गृश्नेश्वर, मल्लिकार्जुन, रामेश्वरम और फिर गंगोत्री तक के चित्र हैं या नहीं, कह नहीं सकता। प्रेमसागर ट्रेवल लाइट में यकीन करने वाले हैं। और उस सिद्धांत से चित्र भी निकल गये! 🙂

बौरारी (नई टिहरी) में राणा होटल

बौरारी में वे राणा होटल में ठहरे। साथ में दोनो महाराष्ट्रीय सज्जन भी थे। वहां के चित्र उन्होने भेजे हैं।

प्रेम सागर बताते हैं कि दोनों मराठी सज्जन उनकी हिंदी समझते हैं और वैसी हिन्दी बोलते हैं जो समझ में आ जाती है। सम्प्रेषण की असुविधा उनके साथ नहीं हुई।

छ मई 2022 – बौरारी से रुद्रप्रयाग

सवेरे छ बजे प्रेमसागर ने सम्पर्क किया तो वे अंतरराज्यीय बस अड्डे पर बस पकड़ कर रुद्रप्रयाग के लिये रवाना हो गये थे। उन्होने बताया कि बारह बजे तक वे रुद्रप्रयाग पंहुचने वाले हैं। वहां से वे ‘आज ही के दिन आगे पांच किलोमीटर ही सही, थोड़ा तो पैदल चलेंगे ही’।

पर वह चलना अंतत: नहीं हो पाया। अगले दिन प्रेमसागर ने बताया कि मौसम खराब हो गया था। आंधी पानी आ गया था। इसलिये रुद्रप्रयाग में ही केदारनाथ-बदरीनाथ आश्रम धर्मशाला में वे रुक गये। यह धर्मशाला वाली जगह यूं ही राह चलते उन्हें दिख गयी थी – “बारिश हो रही थी। यह जगह दिखी तो पूछने पर रुकने के लिये जगह मिल गयी। किराया होटलों की अपेक्षा कम था और भोजन तो प्रबंधक साहब ने अपने घर से मंगवा कर करा दिया। पूरा आतिथ्य!”

सात मई 2022 – रुद्रप्रयाग से आगे

सवेरे साढ़े छ बजे प्रेमसागर अपनी “कांवर कस” रहे थे। कांवर टाइट करना भी कांवरिया-जीवन में मुहावरा हो जाता है। मुहिम पर चलने के पहले की तैयारी कांवर कसना या टाइट करना होती है। अकेले यात्रा करनी है उन्हें। “अकेले ही चलेंगे भईया। कोई रास्ते में मिल जाये तो मिल जाये। वर्ना महादेव तो हैं ही।” प्रेमसागर ने कहा।

मैंने उन्हे उत्तर दिया – “महादेव तो सतत आपके साथ हैं। तभी तो इतनी लम्बी यात्रा कर पाये हैं!”

“सो तो है भईया। पर इतनी लम्बी यात्रा में कभी कभी बीच में हिम्मत डोल जाती है। आप जैसे लोग ही सहारा देते हैं। वर्ना कभी कभी तो चाय के लिये भी पैसा नहीं रहता।”

“पर मैंने तो सोचा कि बहुत से लोग साथ होंगे। गुजरात के लोग साथ नहीं हैं। उनसे बात नहीं होती?”

“होती है, बराबर बात होती है। वे लोग तो बहुत सहायता किये। गौशाला और वृद्धाश्रम के लिये जमीन भी मुहैय्या करा रहे हैं। पर मेन बात है भईया कि मेरे स्वभाव में मुंह खोलना नहीं है। वे लोग अपेक्षा करते हैं कि मुंह खोल कर बोलें तो।”

लगता है मुंह खोलने की अपेक्षा और न खोलने की वृत्ति के बीच द्वन्द्व है। पहले जब प्रेमसागर एकाकी चल रहे थे तो उनके यूपीआई एड्रेस को मैं ब्लॉग पोस्ट में दिया करता था। पता नहीं कि उसकी आवश्यकता बनती है या नहीं? वैसे उनका यूपीआई एड्रेस है – prem12shiv@sbi

शाम तक प्रेमसागर करीब पच्चीस किमी चले। रास्ते में उन्होने रुद्रप्रयाग से निकलते ही मंदाकिनी और अलकनंदा संगम और अन्य स्थलों के चित्र भेजे। मंदाकिनी का जल हरा-नीला और अलकनंदा का श्वेत दीखता है।

रुद्रप्रयाग संगम पर मंदाकिनी (गाढ़ा रंग) और अलकनंदा का जल अलग अलग पता चलता है। चित्र मंदाकिनी की ओर से लिया गया है। प्रेमसागर मंदाकिनी किनारे यात्रा कर रहे हैं।

शाम का डेरा अगस्त्य मुनि लॉज में था। किंवदंति के अनुसार यहीं मंदाकिनी के तट पर अगस्त्य मुनि ने तपस्या की थी। अगस्त्य मुनि (कुम्भज ऋषि) को सामान्यत: दक्षिण भारत से जोड़ा जाता है जिन्होने समुद्र को सोख लिया था या विंध्याचल को और उन्नत होने से रोक दिया था। रामायण में अगस्त्य का आश्रम गोदावरी तट पर था। पर केदार के रास्ते में भी उनकी तपस्थली/गृह स्थान है, यह नई जानकारी थी मेरे लिये।

(अगस्त्य मुनि लॉज और अगस्त्य मुनि तपस्थली, मंदाकिनी के तीर पर।)

आगे का विवरण आने वाली पोस्टों में!

हर हर महादेव! जय केदारनाथ-बदरीनाथ!!!


Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring village life. Past - managed train operations of IRlys in various senior posts. Spent idle time at River Ganges. Now reverse migrated to a village Vikrampur (Katka), Bhadohi, UP. Blog: https://gyandutt.com/ Facebook, Instagram and Twitter IDs: gyandutt Facebook Page: gyanfb

3 thoughts on “कांवरयात्रा – गंगोत्री से रुद्रप्रयाग और आगे

  1. धन्यवाद, प्रेम सागर जी की यात्रा महादेव शिव की कृपा से सकुशल आगे बढ़ती रहे और आपकी लेखनी से हम सब इस यात्रा के वर्चुअल साक्षी होने का संतोष- सुख पाते रहें।
    हर हर महादेव, जय केदार जय बद्री

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  2. दिनेश कुमार शुक्ल फेसबुक पेज पर –
    हर हर महादेव । बहुत दिनों बाद ज्योतिर्लिंग तीर्थयात्री प्रेम सागर जी के दर्शन कराये।दृढ़प्रतिज्ञ लोगों को देखकर अपना भी आत्मबल बढ़ता है।धन्यवाद Gyan Dutt Pandey जी।हर हर महादेव।

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