बस, वह चली जाती है। हम अंग्रेजी तरीके से हाथ हिलाते हैं।
वह आई और चली गयी। बेटियाँ आती ही जाने के लिये हैं!
भारतीय रेल का पूर्व विभागाध्यक्ष, अब साइकिल से चलता गाँव का निवासी। गंगा किनारे रहते हुए जीवन को नये नज़रिये से देखता हूँ। सत्तर की उम्र में भी सीखने और साझा करने की यात्रा जारी है।
बस, वह चली जाती है। हम अंग्रेजी तरीके से हाथ हिलाते हैं।
वह आई और चली गयी। बेटियाँ आती ही जाने के लिये हैं!