पूर्णिया से डगरुआ


सत्यम के घर का मिट्टी का दो बर्तन वाला चूल्हा बड़ा आकर्षक लग रहा है। रात में फोटो बहुत साफ नहीं है, पर एक चित्र बहुत बोलता है बिहार की गांव की जिंदगी के बारे में।

सुकुआर हो गये हैं लोग। कुल्ला करने भी मोटर साइकिल से जाते हैं।


सुकुआर (नाजुक) हो गये हैं लोग। अब मेहनत नहीं करते। अब यह हाल है कि कुल्ला करने (खेत में हगने) भी मोटर साइकिल से जाने लगे हैं। ट्रेक्टर से खेती करते हैं। वह भी आलस से।

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