राम मूर्ति तिवारी


एक पुरनिया आदमी, जिसका पुस्तकों से साथ रहा हो; जो शब्दों को ओढ़ता बिछाता रहा हो वह अपने अनुभवों की अहमियत अच्छे से जान और उन्हे व्यक्त कर सकता है। बयानबे साल की उम्र के समग्र अनुभव कोई कम नहीं होते!

लघुभ्रमणिका


आगे भगवानपुर की ओर कोहरे की एक पट्टी नजर आती है। मानो सलेटी रंग का कोई बहुत मोटा अजगर जमीन पर लेटा और धीरे धीरे रेंग रहा हो। उसके पीछे सूर्योदय हो चुका है। पर उनका ताप कोहरे के अजगर को खतम नहीं कर सका है।

धूल से गुजरते हुये


प्रकृति थोड़ी सी जोन्हरी की बालों के लिये इतना ज्यादा डण्ठल बनाती है। उसे भी किफायती बनना चाहिये। कृषि वैज्ञानिकों को चाहिये कि जोन्हरी की कोई पिगमी पौध विकसित करें। वह जो कम लम्बाई की हो, जिसमें बालें ज्यादा लगें और डण्ठल कम बने।

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