कुल बीस मिनट लगते हैं उसे मेरे जोड़ों की मालिश करने में। इस दौरान मैं सामान्यत: टैब पर कोई लेख या अख़बार का सम्पादकीय सुनता रहता हूं। आज टैब पास नहीं था और वह आ गया। मेरे पास समय था और उसके हाथ, यद्यपि व्यस्त थे, पर बात-चीत तो वह कर ही सकता था। मैंनेContinue reading “गांव भर का हाल”
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ढाई हजार घरों की चाय
[ छियालीस साल हो गये हमारी शादी को। याद नहीं आता कि किसी ने सालगिरह के अवसर पर उपहार दिया हो। इस बार उन लोगों ने दिया जो शादी के समय तो हो नहीं सकते थे — हमारे बिटिया और दामाद ने! उपहार था एक माइक्रोवेव ओवन। ] उसे इंस्टॉल करने दो दिन बाद आएContinue reading “ढाई हजार घरों की चाय”
आँधी, आम और डालें
परसों शाम अचानक आँधी आई। अस्सी किलोमीटर की रफ़्तार से धूल भरी — घटाटोप अँधेरा छा गया। अभी एक घंटा बचा था सूरज ढलने में, पर रोशनी इतनी कम कि लगे रात के आठ बज गये। हमने सारी खिड़कियाँ-दरवाज़े बंद किये। ड्राइवर अशोक को कहा कि वह अंदर आ कर बैठ जाये। पर उसने बतायाContinue reading “आँधी, आम और डालें”
