बेलपत्र तोड़ने वाला संजय


उस दिन संजय के घर जा कर देखा। संजय शाम को बेलपत्र तोड़ कर आया था। हेण्डपम्प पर अपना पैर-हाथ धो रहा था। उसकी बेलपत्रों की गठरियां एक ओर रखी थीं। उसकी माँ ने बताया – संजय अब रात का भोजन करेगा। फिर सो जायेगा।

अमरनाथ बिंद, दर्जी


अमरनाथ ने बढ़िया सिला। उम्मीद से ज्यादा अच्छा।
“गुरुजी, बार बार आपको दुकान पर आना न पड़े, इसलिये सिल कर घर पर ही ले आया हूं। आपके बगल के गांव मेदिनीपुर में ही मेरा घर है। नया-पुराना, जौन भी काम हो मुझे दीजियेगा।”

दीनानाथ की मेहरारू


घर गांव में उनसे उम्रदराज लोग जा चुके। अब वे ही हैं। ऐसा कहने में उनके स्वर में बहुत दुख का भाव नहीं आया। यूं बताया कि वह एक सत्य का वर्णन हो। जीवन की गति और नश्वरता सम्भवत उन्होने स्वीकार कर ली है।

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free