कोहरा न हो, बाजार कुनमुनाता सा खुल रहा हो और आप जिस दुकान के लिये अपनी लिस्ट ले कर साइकिल से निकले हों, वह अभी खुली न हो तो तय मानिये कि या तो आपको खीझ होगी या नई कहानी मिलेगी। मैं सवेरे आठ बजे ही घर से निकल लिया था। साइकिल बिजली वाली थीContinue reading “राजकुमार सेठ उर्फ बाबा प्रधान”
