बरियापुर में गैस सप्लाई


गांवदेहात डायरी मेरा क्या? फटक गिरधारी—न लोटा, न थारी! शांतिधाम की मेस वाला जाने कि मेरा भोजन कैसे बनता है। मेरे कमरे के एक कोने में एक छोटी-सी किचनेट है, जिस पर 600 वाट की बिजली की केतली और चाय का सामान रखा है। एक मिनी फ्रिज है और एक अलमारी में कुछ स्नैक्स केContinue reading “बरियापुर में गैस सप्लाई”

भारी हवा की सुबह


गांवदेहात डायरी आज सुबह सात बजे साइकिल लेकर निकला तो पहली नज़र में ही लगा कि कुछ अलग है। मार्च का महीना है, इसलिए कोहरे की उम्मीद नहीं रहती। पर सामने का दृश्य जैसे धुंध की गहरी चादर में लिपटा था। शांतिधाम से साइकिल गंगा किनारे जाने की बजाय रेल पटरी की ओर मुड़ गई।Continue reading “भारी हवा की सुबह”

साइकिल के कैरियर पर घोड़जई


गांवदेहात डायरी रास्ते में एक साइकिल-ठेले पर सरसों की कटी बालें थीं। उनके ऊपर आड़े तरीके से कुछ खरपतवार रखा था। मैंने ठेले का चित्र रुक कर लिया। बाद में जब पंकज अवधिया जी के घर उनसे मिला तो फोटो दिखा कर पूछा—यह घास क्या है? “और तो खरपतवार है, पर घोड़जई की बालें भीContinue reading “साइकिल के कैरियर पर घोड़जई”

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