मैं सोचता था कहीं लोगों का जमावड़ा नहीं होगा। पर मैँ गलत निकला। एक जगह चालीस पचास की भीड़ थी। … सवेरे सवेरे कजिया (स्त्रियों/ग्रामीणों की रार) हो रही थी।
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
एक किसान का उपहार
सवेरे की साइकिल सैर के दौरान इस उपहार ने मुझे हृदय के अन्दर तक सींच दिया। वापस लौटते समय पूरे रास्ते मैं विजयशंकर जी के बारे में ही सोचता रहा। अगर एक किसान – एक मार्जिनल किसान इतनी दरियादिली रखता है तो मुझे तो अपने दिल को और भी खोलना चाहिये।
तालाब में फंसी घायल नीलगाय
नीलगाय किनारे लगा। उसके एक पैर में शायद चोट लगी थी। इसी कारण वह कुत्तों के चंगुल में आ गया था। भयभीत था और उसकी दुम उसके पृष्ठभाग में दबी हुई थी।
