कुल्हाड़ी में धार देने की उपेक्षा कर सकते हैं हम?


अगर मुझे आठ घण्टे लगाने हैं लकड़ियां चीरने में, तो मैं छ घण्टे लगाऊंगा कुल्हाड़ी की धार देने में – अब्राहम लिंकन इस फटा-फ़ट के जमाने में अब्राहम लिंकन का उक्त कथन अटपटा सा लगता है. कुल्हाड़ी में धार देने की बजाय लोग चिरी चिराई लकड़ी खरीदने में (उत्तरोत्तर) ज्यादा यकीन करने लगे हैं. मैगीContinue reading “कुल्हाड़ी में धार देने की उपेक्षा कर सकते हैं हम?”

क्या केवल जुनून काफी है जीने के लिये?


एक उमर थी जब इब्ने सफी, बी.ए. की जासूसी दुनियां सबेरे पहले पीरियड में शुरू करते थे और तीसरे पीरियड तक खतम हो जाती थी. किराये वाली दुकान से आधी छुट्टी में दूसरी लाते थे और स्कूल से लौटते समय तक वह भी समाप्त हो जाती थी. सातवीं-आठवीं कक्षा में जुनून था जासूसी उपन्यास का.Continue reading “क्या केवल जुनून काफी है जीने के लिये?”

अज़दक, बुढ़ापा और ब्लॉगरी की मजबूरी


जबसे अज़दक जी ने बूढ़े ब्लॉगर पर करुणा भरी पोस्ट लिखी है, तब से मन व्यथित है. शीशे में कोई आपका हॉरर भरा भविष्य दिखाये तो और क्या होगा! इस तरह सरे आम स्किट्सोफ्रेनिया को बढ़ावा देने का काम अज़दक जैसे जिम्मेदार ब्लॉगर करेंगे तो हमारे जैसे इम्पल्सिव ब्लॉगर तो बंटाढ़ार कर सकते हैं. उनकेContinue reading “अज़दक, बुढ़ापा और ब्लॉगरी की मजबूरी”

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