प. विष्णुकांत शास्त्री से क्या सीख सकते हैं चिठेरे?


पण्डित विष्णुकांत शास्त्री (1929-2005) को मैं बतौर आर.एस.एस. के सक्रिय सम्बद्ध व्यक्ति, पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष, भाजपा के उपाध्यक्ष अथवा उत्तरप्रदेश/उत्तराखण्ड के राज्यपाल के रूप में नहीं वरन एक लेखक के रूप में याद कर रहा हूं. और उस रूप में अच्छे ब्लॉगर के लिये एक सबक है – जो मैं बताना चाहता हूं.Continue reading “प. विष्णुकांत शास्त्री से क्या सीख सकते हैं चिठेरे?”

विक्तोर फ्रेंकल का आशावाद और जीवन के अर्थ की खोज


जब भी नैराश्य मुझे घेरता है, विक्तोर फ्रेंकल (1905-1997) की याद हो आती है. नात्सी यातना शिविरों में, जहां भविष्य तो क्या, अगले एक घण्टे के बारे में कैदी को पता नहीं होता था कि वह जीवित रहेगा या नहीं, विक्तोर फ्रेंकल ने प्रचण्ड आशावाद दिखाया. अपने साथी कैदियों को भी उन्होने जीवन की प्रेरणाContinue reading “विक्तोर फ्रेंकल का आशावाद और जीवन के अर्थ की खोज”

हिन्दी ब्लॉगरी में नॉन-कंट्रोवर्शियल बनने के 10 तरीके


झगड़ा-टण्टा बेकार है. देर सबेर सबको यह बोध-ज्ञान होता है. संजय जी रोज ब्लॉग परखने चले आते हैं, लिखते हैं कि लिखेंगे नहीं. फलाने जी का लिखा उनका भी मान लिया जाये. काकेश कहते हैं कि वे तो निहायत निरीह प्राणी हैं फिर भी उन्हे राइट-लेफ़्ट झगड़े में घसीट लिया गया. लिहाजा वे कहीं भीContinue reading “हिन्दी ब्लॉगरी में नॉन-कंट्रोवर्शियल बनने के 10 तरीके”

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