मंघाराम एण्ड संस के असॉर्टेड बिस्कुट कहाँ गये?


बचपन में जे.बी. मंघाराम एण्ड संस के असॉर्टेड (assorted – मिश्रित, विभिन्न, चयनित) बिस्कुट का डब्बा देखा था। ऊपर लक्ष्मी जी की फोटो वाला टिन का चौकोर डिब्बा, जिसमें तरह तरह के बिस्कुट होते थे। दीपावली पर अचानक उसी की याद हो आयी।1 गिफ्ट पैक में आने वाले वे क्रीम और वेफर्स के बिस्कुट, पोलसनContinue reading “मंघाराम एण्ड संस के असॉर्टेड बिस्कुट कहाँ गये?”

आस्था बनी रहे परस्पर – एक मोनोलॉग!


अभय ने ब्लॉग के फुल फीड की बात की परसों और मैने निर्णय लेने में समय नहीं लगाया। फीडबर्नर में खट से समरी फीड को डी-एक्टीवेट कर दिया। पर मैं अभय तिवारी से कहता हूं कि वह धन और उसकी दिव्यता के विषय में विचार बदलें। वह जवान सुनता ही नहीं। पंकज अवधिया जी नेContinue reading “आस्था बनी रहे परस्पर – एक मोनोलॉग!”

सिनिकल हो रहा हूं क्या?


उम्र के साथ सिनिसिज्म (cynicism – दोषदर्शन) बढ़ता है? सामान्यत: हां। इस पर बहुत पढ़ा है। अब तो जिन्दगी फास्ट पेस वाली होने लगी है। लोग अब पैंतालीस की उम्र में सठियाने लगेंगे। नया मोबाइल, नया गैजेट, नया कम्प्यूटर इस्तेमाल करने में उलझन होगी तो कम उम्र में भी असंतोष और उससे उत्पन्न सिनिसिज्म गहरानेContinue reading “सिनिकल हो रहा हूं क्या?”

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