हिन्दी ब्लॉगिंग क्या साहित्य का ऑफशूट है?


बहुत सी समस्यायें इस सोच के कारण हैं कि हिन्दी ब्लॉगिंग साहित्य का ऑफशूट है। जो व्यक्ति लम्बे समय से साहित्य साधना करते रहे हैं – वे लेखन पर अपना वर्चस्व मानते हैं। दूसरा वर्चस्व मानने वाले पत्रकार लोग हैं। पहले पहल, शायद आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के युग में पत्रकारिता भी साहित्य का ऑफशूटContinue reading “हिन्दी ब्लॉगिंग क्या साहित्य का ऑफशूट है?”

बालों की सेहत पर एक पोस्ट


यह श्री पंकज अवधिया की बुधवासरीय अतिथि पोस्ट है। इस पोस्ट में अवधिया जी बालों के विषय में मुक्त चर्चा कर रहे हैं। आप वह पढ़ कर लाभान्वित हों। मैं उनके लिये स्थान छोड़ता हूं: यूं तो पाठकों की समस्याओं पर आधारित दसियों सन्देश लगातार मिल रहे हैं पर चूँकि इसमे बालों की विभिन्न समस्याओंContinue reading “बालों की सेहत पर एक पोस्ट”

पारम्परिक चिकित्सा पर वनस्पति विज्ञानी का कथन


अपनी इस बुधवासरीय अतिथि पोस्ट में वनस्पति विज्ञानी श्री पंकज अवधिया पारम्परिक चिकित्सा पर अपने विचार रख रहे हैं। पारम्परिक चिकित्सा का विषय बहुत कुछ योगिक ज्ञान के विषय सा ही है। कुछ समय से हम आम आदमी में भी योग विषयक हलचल देख रहे हैं। कुछ वैसा की राग पारम्परिक चिकित्सा के विषय मेंContinue reading “पारम्परिक चिकित्सा पर वनस्पति विज्ञानी का कथन”

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