खसरा से जूझती माँएँ


एक जगह बीमारी देवी से बात करती है, एक जगह सिस्टम से, और एक जगह सिर्फ़ माँ से। मैं दलित बस्ती के समीप रहता हूं। वहां कई बच्चों को माता निकली हैं। माता अर्थात खसरा या मीजल्स। वहां जिंदगी फिर भी चल रही है।  खसरा कोई नई बीमारी नहीं है पर  समाज के लिए खसराContinue reading “खसरा से जूझती माँएँ”

चक्रीय ताल की दिनचर्या


आगे के जीवन के बारे में नजरिया बदला लगता है। पहले जीवन की दीर्घायु के लक्ष धुंधले लगते थे; अब उनमें स्पष्टता आती जा रही है। नकारात्मकता को चिमटी से पकड़ कर बाहर निकालने की इच्छा-शक्ति प्रबल होती जा रही है।

पसलियों में दर्द – पलई पिरात बा


गांवदेहात में लोग उस व्यक्ति से पैर का पसलियों पर स्पर्श करवाते हैं, जो उल्टा पैदा हुआ हो। अर्थात प्रसव में जिसका पैर पहले बाहर आया हो। … उनकी मांग होती है पसलियों के दर्द में।

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