सिद्धार्थ और हम गये थे गंगा तट पर। साथ में उनका बेटा। वहां पंहुचते रात घिर आई थी। आज वर्षा का दिन था, पर शाम को केवल बादल क्षितिज पर थे। बिजली जरूर चमक रही थी। बिल्ला, जोला और कल्लू मछेरा समेटे जाल के साथ गंगा माई बढ़ी नहीं हैं पहले से। अंधेरे में मछेरेContinue reading “बिल्ला, जोला और कल्लू”
Category Archives: Uncategorized
नागपंचमी
आजके दिन कुछ ज्यादा चहल-पहल है गंगा तट पर। नागपंचमी है। स्नानार्थियों की संख्या बढ़ गयी है। एक को मैने कहते सुना – इहां रोजिन्ना आते थे। आजकल सिस्टिम गडअबड़ाइ गवा है (रोज आते थे गंगा तट पर, आजकल सिस्टम कुछ गड़बड़ा गया है)। भला, नागपंचमी ने सिस्टम ठीक कर दिया। कल ये आयेंगे? कहContinue reading “नागपंचमी”
कहां से आता है निरापद लेखन?
सब विचार की देन है। निरापद विचार क्या होता है जी? आइडिया अगर अन्दर से आते हैं तो वे ब्लॉग का मसाला नहीं बन सकते। वे आपको महान ऋषि बना सकते हैं। शुष्क और महान। पर वे आपके ब्लॉग को चौपाल नहीं बना सकते। ब्लॉग के मसाले के लिये आपको बाहर देखना ही पड़ता है।Continue reading “कहां से आता है निरापद लेखन?”
