मेरे सामने कंघी के साथ कंकही पड़ी है। कंकही वह साधारण उपकरण है जो बालों से जुएं निकालने के काम आता है। मानव इतिहास में शायद ही कोई समाज रहा हो जहां जुएं न रही हों। जहां जुएं रहीं, वहां उन्हें निकालने के उपाय भी विकसित हुए। तेल लगे बालों को फैलाना और कंकही सेContinue reading “अगियाबीर की कंकही “
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ढाई हजार घरों की चाय
[ छियालीस साल हो गये हमारी शादी को। याद नहीं आता कि किसी ने सालगिरह के अवसर पर उपहार दिया हो। इस बार उन लोगों ने दिया जो शादी के समय तो हो नहीं सकते थे — हमारे बिटिया और दामाद ने! उपहार था एक माइक्रोवेव ओवन। ] उसे इंस्टॉल करने दो दिन बाद आएContinue reading “ढाई हजार घरों की चाय”
आँधी, आम और डालें
परसों शाम अचानक आँधी आई। अस्सी किलोमीटर की रफ़्तार से धूल भरी — घटाटोप अँधेरा छा गया। अभी एक घंटा बचा था सूरज ढलने में, पर रोशनी इतनी कम कि लगे रात के आठ बज गये। हमने सारी खिड़कियाँ-दरवाज़े बंद किये। ड्राइवर अशोक को कहा कि वह अंदर आ कर बैठ जाये। पर उसने बतायाContinue reading “आँधी, आम और डालें”
